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Shiksha Mitra के साथ हो रहे भेदभाव को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने Shiksha Mitra को स्थाई शिक्षक बनाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। अनिल कुमार यादव ने कहा कि Shiksha Mitra से शुरू से भेदभाव किया जा रहा है जिसके कारण उन्हें कम वेतन पर भी कार्य करना पड़ता है और इस महंगाई के जमाने में उनका भरण पोषण नहीं हो पा रहा है।

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अनिल कुमार यादव ने कहा कि Shiksha Mitra और शिक्षक विद्यालय में जब एक ही पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं तो फिर शिक्षकों को ₹50000 प्रतिमाह वेतन और Shiksha Mitra को सिर्फ ₹10000 प्रतिमाह वेतन क्यों दिया जाता है।
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अनिल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से Shiksha Mitra के इस मामले को स्वयं संज्ञान में लेने को कहा तथा Shiksha Mitra को स्थाई शिक्षक बनाने की गुहार लगाई। आगे उन्होंने कहा कि 69000 shikshak bharti मामले को जल्द से जल्द पूरी करवाई जानी चाहिए जिससे सभी शिक्षामित्रों को इसका लाभ मिल सके।

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Basic shiksha parishad up के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे Shiksha Mitra के हाथ से नौकरी के दो अवसर पहले ही निकल चुके हैं। बावजूद इसके एक लाख से अधिक Shiksha Mitra ढाई साल से दर दर की ठोकरें खाने पर मजबुर हैं। 10 हजार रुपये महीने की एक छोटी सी रकम पर किसी तरह गुजारा कर रहे हैं। इतनी कम मासिक वेतन के कारण Shiksha Mitra के लिए जीवन यापन मुश्किल हो रहा है। दो अवसर पूरे होने के बाद 22 दिसंबर 2019 को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में जो ऑनलाइन आवेदन लिए गए उसमें Shiksha Mitra से किसी भी प्रकार का कोई सूचना नहीं लिया गया।
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इसके पहले हुए 2017 और 2018 की उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में Shiksha Mitra से अलग से विशेष सूचना ली गई थी, क्योंकि उसी सूचना के आधार पर उन्हें भर्ती में वेटेज दिया जाना तय किया गया था। 25 जुलाई 2017 को Supreme court ने बगैर यूपी टीईटी सहायक अध्यापक पद पर 137517 एक लाख सैंतीस हजार पांच सौ सत्रह शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया था और उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि दो भर्तियों में शिक्षामित्रों को अनुभव का लाभ देकर अवसर प्रदान किया जाए। उसके 6 महीने बाद 17 जनवरी 2018 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए पहली बार सहायक अध्यापक की लिखित परीक्षा का आदेश जारी किया था।

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अब 27 मई को ली गई लिखित परीक्षा में तकरीबन 7200 Shiksha Mitra पास हो गए थे। जिन्हें 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षक बनने का मौका मिला। 68500 Shikshak bharti के बाद 6 जनवरी 2019 को 69000 shikshak bharti के लिए परीक्षा कराई गई लेकिन परीक्षा के कटऑफ अंक को लेकर विवाद शुरू हो गया था और परीक्षा नियामक प्राधिकारी 11 महीने बाद भी अंतिम उत्तरकुंजी जारी नहीं कर सका। और इस तरह से शिक्षामित्रों के हाथों से दो मौके निकल गए और इन 2 मौकों में सिर्फ सात हजार शिक्षामित्रों को ही नौकरी मिल सकी। शेष बचे हुए 1.30 लाख शिक्षामित्र अपनी पक्की नौकरी की आस में सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे हैं।
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उत्तर प्रदेश में लगभग 20 वर्ष पूर्व शिक्षामित्रों को नौकरी पर रखने की योजना बनाई गई थी।
1 - 26 मई 1999 में उत्तर प्रदेश में Shiksha Mitra योजना लागू की गई थी।
2 - अक्तूबर 2005 में मानदेय 2250 रुपये से बढ़कर 2400 किया गया था।
3 - 15 जून 2007 को मानदेय 2400 रुपये से बढ़कर 3000 किया गया था।

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4 - 11 जुलाई 2011को शिक्षामित्रों के दो वर्षीय प्रशिक्षण का आदेश जारी किया गया था।
5 - 23 जुलाई 2012 को सहायक अध्यापक पद पर समायोजन का निर्णय लिया गया था।
6 - 19 जून 2014 को प्रथम बैच के शिक्षामित्रों के समायोजन का आदेश जारी किया गया था।
7 - 06 जुलाई 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन पर रोक लगा दी थी।
8 - 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने समायोजन निरस्त कर दिया था।
9 - 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन को गैरकानूनी करार ठहरा दिया था।
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ऊपर पॉइंट 1 से लेकर 9 तक आपने देखा कि किस प्रकार से Shiksha Mitra को एक बार नौकरी के लिए रखा गया और धीरे-धीरे उनको गैरकानूनी करार ठहरा दिया गया। इसमें 26 मई 1999 से लेकर 25 जुलाई 2017 के सभी बदलाव को दिखाया गया है।

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